दिवाली पूजन में महालक्ष्मी का महत्व

श्री लक्ष्मी के पावन ‍दिव्य स्वरूप

श्री उत्तर ऋग्वेद के श्रीसूक्त के मुताबिक श्री यानी वैभव, समृद्धि, यश और सबसे बढ़कर यानी सुकून है। भगवान विष्णु के आदेश पर देव-दानवों ने क्षीरसागर का मंथन किया और अन्य रत्नों के साथ लक्ष्मी भी जल के ऊपर आईं। लक्ष्मी यानी चंचला लेकिन विष्णु को पति के रूप में वरण कर वे शेषशायी की सहचरी के आदर्श रूप पतिपरायण यानी श्री महालक्ष्मी के रूप में स्वीकार की गईं। 

श्री महालक्ष्मी जो तमोगुण रूप धारण कर महाकाली भी कहलाईं, सत्वगुण संपन्ना होने पर महासरस्वती हैं। दोनों का संयुक्त स्वरूप यानी स्थिर लक्ष्मी है। यही वजह है कि दीपावली पूजन में लक्ष्मीजी के साथ सरस्वतीजी भी शामिल रहती हैं।