दिवाली पूजन में महालक्ष्मी का महत्व

श्री लक्ष्मी के पावन ‍दिव्य स्वरूप

श्री उत्तर ऋग्वेद के श्रीसूक्त के मुताबिक श्री यानी वैभव, समृद्धि, यश और सबसे बढ़कर यानी सुकून है। भगवान विष्णु के आदेश पर देव-दानवों ने क्षीरसागर का मंथन किया और अन्य रत्नों के साथ लक्ष्मी भी जल के ऊपर आईं। लक्ष्मी यानी चंचला लेकिन विष्णु को पति के रूप में वरण कर वे शेषशायी की सहचरी के आदर्श रूप पतिपरायण यानी श्री महालक्ष्मी के रूप में स्वीकार की गईं। 

श्री महालक्ष्मी जो तमोगुण रूप धारण कर महाकाली भी कहलाईं, सत्वगुण संपन्ना होने पर महासरस्वती हैं। दोनों का संयुक्त स्वरूप यानी स्थिर लक्ष्मी है। यही वजह है कि दीपावली पूजन में लक्ष्मीजी के साथ सरस्वतीजी भी शामिल रहती हैं।

दिवाली का महत्व

अँधेरे पर उजालों की जीत तथा असत्य पर सत्य की विजय के आधार को ध्यान में रख कार्तिक मास की अमावस्या के दिन दीपावली का त्यौहारपूरे भारतवर्ष में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है | इस महापर्व के सुअवसर पर हिंदू , सिख, बौध ,जैन सभी विघ्नहर्ताभगवान गणेश और माता महालक्ष्मीका पूजन करते हैं | हिन्दू धर्म ग्रन्थ में वर्णित कथाओं के अनुसार दीपावली का यह पावन त्यौहार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के बाद बनवास के बाद अपने राज्य में वापस लौटने की स्मृति में मनाया जाता है | व्यापारीगण दिपावली के दिन दीपों की माला सजाकर नई बही खातों का मुहूर्त करते हैं 
इस दिन दीपकों की पूजा का विशेष महत्व होता है | इस दिन रात के अंधेरे को दूर करते हुए माना जाता है कि दीपमाला को लगा कर प्रकाश के द्वाराअसत्य पर सत्य की जीत व आध्यात्मिक अज्ञानता को दूर किया जा रहा है | इन सभी धर्मप्रेमियोंका ये विश्वास है कि मां लक्ष्मी की पूजा करने से उनके घर में कभी भी दरिद्रता का वास नहीं होगा और वे सदा ही अन्न, धन, धान्य व वैभव से संपन्न रहेंगे | दिपावली का ये पर्वसही अर्थोंमें समाज में उल्लास, भाई-चारे व प्रेम का सन्देश फैलता है |

कर्म का रहस्य

कर्म तीन प्रकार के बताये गए हैं : - [ १ ] संचित - अनेक पूर्व जन्मों से लेकर अब तक किये गए संग्रहित कर्मों को संचित कर्म कहते हैं | [ २ ] प्रारब्ध - अपार संचित कर्मों से , पुन्य - पाप के ढेर में से कुछ अंश लेकर जो शरीर बनता है , उसमें इस जन्म में भोगने वाले कर्म - फल , जो परिपक्व होने पर फल के रूप में मनुष्य को प्राप्त होते हैं , उनको प्रारब्ध कहते हैं | इस प्रकार जब तक संचित कर्म शेष हैं , उनसे प्रारब्ध [ कर्म - फल ] बनता ही रहता है | अर्थात जब तक सारे संचित कर्म नष्ट नहीं हो जाते , मनुष्य की मुक्ति नहीं हो सकती | क्योंकि संचित से स्फुरणा , स्फुरणा से क्रियमाण [ नए किये जाने वाले कर्म ] और क्रियमाण से पुन: संचित तथा संचित के अंश से प्रारब्ध | इस प्रकार जीव कर्म - प्रवाह में बहता ही रहता है | [ ३ ] क्रियमाण - मन वचन और शरीर से मनुष्य जो कुछ नए कर्म करता है , वह जब तक क्रिया रूप में रहता है , तब तक वह क्रियमाण कहलाता है और पूरा होते ही तत्काल संचित बन जाता है | जैसे नई कमाई करना क्रियमाण है और बैंक में जमा होते ही संचित हो जाता है | नए कर्म करने में , भगवान ने मनुष्य को स्वतंत्रता दी है | वह देवी संपदा का आश्रय भी ले सकता है और आसुरी का भी | 

आकस्मिक धन प्राप्ति केलिए ..(शेयर मार्केट या अन्य में लाभदायक )

धन प्राप्ति  तो  एक ऐसी  क्रिया हैं जो सबके मन को भांति हैं  जीवन मे  धन के  बिना  किसी  भी  चीज का  वैसा  अस्तित्व नही हैं जैसा  की होना  ही  चाहिए .आधिन्काश आवश्यकताए   तो केबल धन  के माध्यम से  कहीं जायदा  सुचारू  रूप  से  पूरी हो जाती हैं ..
पर  धन का आगमन भी  तो एक अनिवार्य आवश्यकता हैं  पर  जो एक बंधी   बंधाई  धन राशि   हर महीने मिलती हैं  वह  तो  एक निश्चित  रूप  से  खर्च  होती हैं.. पर कहीं से  यदि कोई आकस्मिक धन यदि हमें  मिल जाता हैं  तो   वह  बहुत  ही प्रसन्नता दायक  होता हैं .
पर  यह आकस्मिक धन आये कहाँ से ..यह  सबसे बड़ा प्रश्न  अब हर किसी  को   तो गडा धन  नही मिल  सकता हैं .  तो व्यक्ति  नए नए  माध्यम देखता हैं कि कैसे   इसकी  सम्भावनए बनायी  जाए   या  हो पाए  .
और सबसे  ज्यादा हर व्यक्ति   का  रुझान हैं  तो वह् हैं  शेयर मार्केट की ओर ..रो ज  जोभी  सुचनाये  आती हैं  वह   होती हैं  शेयर मार्केट  की.. की उसने  इतना फायदा   लिया या   वह  पूरी  तरह से  बर्बाद  हो गया  ..फिर  भी लोग धनात्मक पक्ष कहीं जयादा  देख्ते  हैं .मतलब की  फायदा  होता ही  हैं . अब  जो लंबी अवधि के लिए   अपना  धन लगाते  हैं  वह कहीं ज्यादा लाभदायक  होते हैं  और  जो कम अवधि के लिए  उनके लिए क्या  कहा जाए  यह बहुत ही ज्यादा  जोखिम भरा  सौदा हैं .
  पर  एक साधना  ऐसी भी हैं   जिसके  सफलता   पूर्वक करने  से  व्यक्ति का  जोखिम बहुत कम   हो जाता हैं .. और व्यक्ति   को लाभ की सम्भावनाये  कहीं  अधिक   होती हैं
जप संख्या – ११  हज़ार  हैं  दिन्  निर्धारित  नही हैं  जब जप समाप्त हो जाये  तो  १०८  आहुति इस  मन्त्र  से कर दे.  और आप देखेंगे  की स्वयं  ही नए  नए  स्त्रोत से  घनागम की  अवश्यकताए  पूरी  होती जाएँगी.

कैसे ज्ञात करें गडा हुआ धन!

कई बार हमें किसी स्थान पर गडे हुये धन के होने का अंदशा होता है। बिना किसी ठोस आधार एवं दिव्य आज्ञा के उस स्थान को खोदने की गलती कभी नहीं करनी चाहिये। ऎसे किसी भी संदेह की स्थिति में नित्य संध्याकाल के समय जहां धन का अंदेशा हो वहां एक शुद्ध घी का दीपक जिसमें एक लौंग भी हो, लगाना चाहिये। ऎसा करने से 40 दिनों के भीतर यदि वहां धन होता है तो दीपक लगाने वाले को स्वप्न के माध्यम से उसकी जानकारी हो जाती है, सवप्न में ही उसे खोदना है अथवा नहीं, यह भी निर्देश मिलता है। इसी प्रकार जहां धन का अंदेशा हो वहां एक छोटा सा स्थान स्वच्छ कर उस पर एक लकडी का पाटा रख दें। उस पर एक नागरबेल का पान अथवा पीपल का पत्ता रखकर उस पत्ते पर एक पूजा की सुपारी रखकर उस पर हल्दी, कुंकुम, अक्षत आदि अर्पित कर उसके समक्ष घी का दीपक लगायें जो कि 5-7 मिनट के लिये जलता रहे। नित्य ऎसा करें।
पत्ते और सुपारी को विसर्जन हेतु शुद्ध एवं स्वच्छ स्थान पर रख लें। इस प्रयोग को 40 दिनों तक इस प्रार्थना के साथ करें कि यहां जो भी शक्ति विराजित हो वह हमें मार्गदर्शन दे। यदि धन प्राçप्त के योग होंगे तो निpय ही प्रयोगकर्ता को संकेत प्राप्त होगा। अति उत्साह में आकर अथवा किसी तांत्रिक के बताने पर धन लिकालने के लिये खुदाई आदि करना प्रारम्भ नहीं कर दें। ऎसा करने पर कभी-कभी गम्भीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। अनेक लोग अपने घरों में पशु पशुओं को पालते हैे। इनमें अधिकतर दूध देने वाले पशु होते हैं।
कभी-कभी बिना किसी विशेष कारण के उनके पशु मर जाते हैं। इस कारण उन्हें बहुत नुकसान होता है। इस समस्या से मुक्ति प्राप्त करने हेतु अग्रांकित प्रयोग काम में लायें। लोहे अथवा लकडी की एक ऎसी खूँटी बनवायें जो छ: भागों में विभाजित हो। इस खूँटी का पहले भली प्रकार से पूजन करें एवं पशु रक्षा की कामना करते हुये इसे पशुशाला में किसी भी एक कोने में गाड दें। इसके ठीक ऊपर छत पर एक बांसुरी किसी धागे या डोरी से लटका दें। ऎसा करने से पशुओं का आकरण मरना बंद हो जाता है। खुँटी चित्र में दर्शायी गई है। एक अन्य उपाय के अन्तर्गत जहां भी पशु बांधे जाते हैं वहां नित्य घी तथा गूगल की धूनी गाय के गोबर के कण्डे को जलाकर उस पर देनी चाहिये। इसी प्रकार संबंधित स्थान पर बांसुरी वादन करते हुये भगवान श्रीकृष्ण का ऎसा फोटो भी लगा देना चाहिये जिसमें एक या अधिक गायें श्रीकृष्ण के साथ हों।

चिन्ता हटाने का टोटका

अधिकतर पारिवारिक कारणों से दिमाग बहुत ही उत्तेजना में आजाता है,परिवार की किसी समस्या से या लेन देन से,अथवा किसी रिस्तेनाते को लेकर दिमाग एक दम उद्वेलित होने लगता है,ऐसा लगने लगता है कि दिमाग फ़ट पडेगा,इसका एक अनुभूत टोटका है कि जैसे ही टेंसन हो एक लोटे में या जग में पानी लेकर उसके अन्दर चार लालमिर्च के बीज डालकर अपने ऊपर सात बार उबारा (उसारा) करने के बाद घर के बाहर सडक पर फ़ेंक दीजिये,फ़ौरन आराम मिल जायेगा।

मानसिक परेशानी दूर करने के लिए

रोज़ हनुमान जी का पूजन करे व हनुमान चालीसा का पाठ करें ! प्रत्येक शनिवार को शनि को तेल चढायें ! अपनी पहनी हुई एक जोडी चप्पल किसी गरीब को एक बार दान करें !